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दोसर दिन ब्रह्म ज्ञानक प्रतिमूर्ति ब्रह्मचारिणीक पूजा हेतनि।

| धर्म

मधुबनी,मिथिला मिरर-सुजीत कुमार झाः प्रतिपदाक दिन मां शैलपुत्रीक पूजाक बाद आब दोसर दिन मां ब्रह्मचारिणीक पूजा हैत। मां ब्रह्मचारिणीकें ब्रह्म ज्ञान सं परिपूरति मानल जाइत अछि। ब्रह्मक अर्थ ज्ञान होइत अछि आ चारिणीक अर्थ आचरण करैवला। अहि प्रकारे कहि सकैत छी जे तप आ आचरणकें जाहि रूपमे हमरा सब देखैत आ सोचैत छी ओ मां ब्रह्चारिणीक स्वरूप थिकैन।
ब्रह्मचारिणी रूपमे मैयाक दहिना हाथमे जाप करैत माला रहैत छन्हि त बामा हाथमे कमण्डल रहैत छन्हि। अहि रूपमे मैयाक अराधना केला सं धन, धान्यक संग-संग विद्या वैभवमे सेहो वृद्धि होइत अछि। त आउ सब कियो मिली-जुलि मा ब्रह्तचारिणीक पूजा अहि मंत्र सं करी आ जीवनमे बल, बुद्धि, विद्याा आ वैभवक बढ़ौतरी करी। जय दुर्गे मां, जय मां ब्रह्चारिणी।
या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै, नमस्त्स्यै, नमस्तस्यै नमो नमः

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