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बौरहवाक डम-डम डमरूक संगीत पर सतत् आनंदे रहता ‘‘मधुकर’’

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दिल्ली-मिथिला मिररः मिथिलाक लेल बुधदिन निश्चित रूपहि कारि स्याह दिन मानल जाएत, कारण कालांतरमे जिनकामे बाबा विद्यापतिक स्वरूपम झलकैत छल ओहने हस्ताक्षर मधुकांत झा ‘‘मधुकर’’ हमरा लेाकनिकेँ छोइर अनंत यात्रा पर निकलैत भेलाह। बाबा नीलकंठक अनन्य भक्त, भक्ति गीतक महान रचैयता, आदर्श शिक्षक आ एकटा जीवैत व्यक्तित्व मधुकांत झा ‘‘मधुकर’’ मूल रूपसँ मिथिला, बिहारक सहरसा जिलाक चैनपुर गामक निवासी छलाह। मधुकर जी केर लिखल गीत ‘‘डम-डम डमरू बजबै छै हमर जोगिया’’ ‘हम आनंदे रहबै यौ, बम भोला केँ दरबार’’ आहो शिव महेश्वर, बसहा चढ़ल शिव शंकर, आबो तऽ आबह भवेश उगनाक रूपमे, हमरा केवल एक भरोसा नीलकंठ दानीकेँ, उमापति आब करू जुनि देरि इत्यादि गीत सबदिनक लेल कायजयी भए गेल।
मधुकर जी करे विषयमे कहैत मैथिलीक चर्चित गीतकार, सिनेमा निर्देशक किसलय कृष्ण कहैत छथि जे बाबाक खासियत ई छलनि जे 100 सँ अधिक उम्र भेलाक बादो ओ नित्य लिखैत छलाह। नहि हुनकर आंखि कमजोर भेल छलैन्ह आ नहि दांत। जखन हुनका सं हुनक रचनाक विषयमे पूछल जाइत छलैन्ह तऽ ओ कहैत छलाह जे हम कोनो रचना नहि करैत छी। रचना तऽ स्वयं महादेव अपने करवा लैत छथि। किसलय कहैत छथि जे बाबामे एकटा बात स्पष्ट देखाइत छल जे ओ हो ओहिना रहैत छलाह जेना कि हमरा सब बाबा विद्यापतिक विषयमे सुनैत आबि रहलौह अछि।
अपने केँ बता दी जे मधुकर जी केर डम-डम डमरू बजबै छै हमर जोगियाकेँ भोजपुरी भाषामे सेहो गायल गेल अछि आ हुनके एकटा गीत हम आनंदे रहबै यौ गाबि गायक माधव राय प्रायः मिथिलाक जन-जन तक स्थान बनौलाह अछि। मुदा ई एकटा विडंबना थिक जे जाहि गीतक गीतकारक नाम लोककेँ नहि बूझल रहैत छैन्ह तऽ ओहि गीतकेँ मिथिलाक सौजन्य सँ बना देल जाइत अछि। बाबा मधुकर जी केँ मिथिला मिरर परिवारक दिस सँ सेहो श्रद्धांजलि आ शोकाकुल परिवारकेँ प्रति संवेदना।

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